रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में गृह मंत्री ने लिया भाग
रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त होने के बाद छत्तीसगढ़ अब विकास, समृद्धि और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा। आने वाले समय में राज्य को देश के शीर्ष तीन पर्यटन राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि अगले 10 वर्षों में छत्तीसगढ़ की धरती के साथ यहां के लोग भी समृद्ध होंगे। नवा रायपुर में पांच लाख पीपल के पेड़ लगाकर इसे ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण-अनुकूल शहर बनेगा।
अमित शाह मंगलवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ के लिए प्रदेशवासियों, विशेषकर आदिवासी समाज को बधाई दी। इस सफलता का श्रेय केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों को दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
अटल बिहारी वाजपेयी को किया याद
गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देते हुए कहा कि वर्ष 2000 में उन्होंने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा देकर यहां के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्य बनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे विकास की नई दिशा मिली है।
अमित शाह ने इस दिन को छत्तीसगढ़ के लिए गौरव, सिद्धि और संकल्प का दिन बताया। उन्होंने कहा कि गौरव अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत का है, सिद्धि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ और नक्सलमुक्त भारत के संकल्प की है तथा संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का है।
लोक संस्कृति और आदिवासी परंपराओं को मिल रही पहचान
अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराएं देश की अनमोल धरोहर हैं। गुरु घासीदास का संदेश तथा गुरु नानक देव की सेवा, समानता और सच्चाई की सीख यहां के सामाजिक संस्कारों का हिस्सा हैं। राज्य सरकार छत्तीसगढ़ पंडुम और बस्तर ओलंपिक के माध्यम से लोक संस्कृति को आगे बढ़ा रही है। पंथी, पांडवानी, राउत नाचा, कर्मा और सैला जैसे लोकनृत्यों के साथ ढोकरा कला, बेल मेटल, काष्ठ शिल्प और कोसा को भी नई पहचान मिल रही है। उन्होंने बस्तर दशहरे की 75 दिनों तक चलने वाली अनूठी परंपरा का भी उल्लेख किया।
नक्सलवाद ने रोकी विकास की राह
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में विकास और शिक्षा प्रभावित हुए। जिन इलाकों में सांस्कृतिक गलियारे विकसित होने चाहिए थे, वहां हिंसा और भय का वातावरण बना रहा। जंगलों में महुआ, तेंदूपत्ता और लोकगीतों की जगह बारूदी सुरंगों का खतरा रहा। बच्चों के हाथों में कलम की जगह बंदूकें थमाई गईं और स्कूलों की जगह हिंसा ने ले ली।
उन्होंने मानवाधिकार के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों से सवाल किया कि क्या मानवाधिकार केवल हथियार उठाकर विकास रोकने वालों के लिए हैं, गरीब आदिवासियों के लिए नहीं? उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में अपने हाथ-पैर गंवाने वाले लोगों को सरकार कृत्रिम अंग उपलब्ध कराकर फिर से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर टिप्पणी करने वालों से वहां जाकर विकास कार्यों और आदिवासी समाज की वास्तविक स्थिति देखने का आह्वान किया।
नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील की
अमित शाह ने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध स्पष्ट नीति अपनाई है। उन्होंने दावा किया कि इस नीति के तहत 90 प्रतिशत नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 10 प्रतिशत मुठभेड़ों में मारे गए। उन्होंने कहा कि जो लोग कानून का पालन करते हैं, उनके साथ नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाता है, लेकिन कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उन्होंने विपक्षी दल पर नक्सलवाद के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप भी लगाया।
‘जनताना सरकार’ और मॉक पार्लियामेंट पर उठाए सवाल
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में ‘जनताना सरकार’ के नाम से समानांतर व्यवस्था चलाने का प्रयास किया और निर्दोष पत्रकारों, समाजसेवियों तथा विद्यार्थियों की हत्याएं कीं। उन्होंने विपक्ष पर ऐसी गैर-संवैधानिक व्यवस्था का समर्थन करने का आरोप लगाया। मॉक पार्लियामेंट के आयोजन को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि इस तरह के आयोजन संसद की गरिमा का मखौल उड़ाते हैं।
संसद में चर्चा की दी चुनौती
अमित शाह ने कहा कि संविधान का सम्मान केवल उसे हाथ में लेकर चलने से नहीं, बल्कि अपने आचरण में संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने से होता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से संसद की कार्यवाही चलने देने और चर्चा में भाग लेने की अपील की। अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कम समय में 70 प्रतिशत से अधिक गारंटियां पूरी की हैं। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त महिलाओं के खातों में भेजी गई है। धान खरीदी जारी है तथा कृषि, वनोपज, पशुपालन और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम जैसे क्षेत्रों में भी काम आगे बढ़ रहा है।
पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा छत्तीसगढ़
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त होने के बाद छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, मां बम्लेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी और बस्तर दशहरा जैसे स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
शिक्षा और अर्थव्यवस्था में हुई प्रगति का उल्लेख
अमित शाह ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ के बारे में कहा जाता था कि यहां की धरती तो समृद्ध है, लेकिन लोग गरीब हैं। अब सरकार का लक्ष्य धरती और लोगों दोनों को समृद्ध बनाना है। उन्होंने दावा किया कि राज्य का वार्षिक बजट 30 गुना, प्रति व्यक्ति आय 17 गुना और सकल राज्य घरेलू उत्पाद 25 गुना बढ़ा है। उनके अनुसार, इस अवधि में आईटीआई की संख्या दोगुनी, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तीन गुनी तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की संख्या छह गुनी हुई है। साक्षरता दर भी 65 प्रतिशत से बढ़कर 79 प्रतिशत तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ को भय से भरोसे और संसाधनों से समृद्धि की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। लक्ष्य ऐसा खुशहाल राज्य बनाने का है, जहां विकास की संभावनाएं उपलब्धियों में बदलें और यहां के लोग स्वाभिमान तथा समृद्धि के साथ जीवन जी सकें।
(स्रोत : पीआईबी)