तवेरे में ‘शांत रहने की कला’ पर ब्रह्माकुमारीज की विशेष कार्यशाला, वरिष्ठ नागरिकों को सिखाए आंतरिक शांति के सूत्र

तवेरे (रूस)। जीवन की भागदौड़ और बदलती परिस्थितियों के बीच मन को शांत और संतुलित रखना आज एक बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी उद्देश्य से ब्रह्माकुमारीज के तवेरे स्थित आध्यात्मिक विकास केंद्र की ओर से क्षेत्रीय कार्यक्रम ‘सक्रिय दीर्घायु’ के अंतर्गत ‘आत्मा की शांति’ क्लब की गतिविधियों का शुभारंभ किया गया। तवेरे कॉम्प्लेक्स सेंटर फॉर सोशल सर्विसेज में आयोजित इस सत्र का विषय ‘शांत रहने की कला’ रहा।

दो विशेष बैठकों में प्रतिभागियों ने जीवन में मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को समझा। उन्हें बताया गया कि ध्यान और विश्राम का नियमित अभ्यास न केवल तनाव कम करने में सहायक है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन तंत्र, एकाग्रता और नींद की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे बढ़ती उम्र में भी व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रह सकता है।

ब्रह्माकुमारीज के प्रतिनिधियों ने कहा कि शांति आत्मा का मूल स्वभाव और सहज गुण है। बाहरी परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन यदि मनुष्य अपने आंतरिक संतुलन का अभ्यास करे तो विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रह सकता है। शांति कोई बाहरी उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मा की ऐसी आंतरिक शक्ति है, जिसे नियमित अभ्यास से जागृत और सुरक्षित रखा जा सकता है। आज हमारे विचार और भावनाएं ही आने वाले समय के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की आधारशिला बनाते हैं।

बैठक में प्रतिभागियों ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए और बताया कि मानसिक शांति बनाए रखने के लिए सकारात्मक चिंतन तथा स्वयं के प्रति जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान निर्देशित संगीत ध्यान का अभ्यास भी कराया गया। इस अभ्यास से प्रतिभागियों को कुछ समय के लिए बाहरी हलचल से दूर होकर आंतरिक मौन और शांति का अनुभव करने का अवसर मिला।

 

क्लब की आगामी बैठकों में आत्मा का वास्तविक स्वरूप, मानवीय संबंधों के सूक्ष्म नियम, कर्मों का सिद्धांत और समय की आध्यात्मिक समझ जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। ‘आत्मा की शांति’ क्लब की बैठकें महीने में दो बार आयोजित होंगी। इस पहल के प्रारंभिक चरण में वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वे आध्यात्मिक चिंतन, ध्यान और सकारात्मक जीवनशैली के माध्यम से जीवन के इस पड़ाव को अधिक शांत, स्वस्थ और आनंदमय बना सकें।

— सिस्टर इरीना, तवेरे केंद्र, रूस

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