एक अनोखी लैब… जहां नए विचारों का किया जाता है सृजन, आप जानकर होंगे हैरान….

बदलाव की कहानी…. स्पेशल स्टोरी

– ब्रह्माकुमारीज की राजयोग थॉट लैब बनी युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र, 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ

– जयपुर, गुरुग्राम और कुरुक्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में स्थापित लैब से विद्यार्थियों की सोच, व्यवहार और जीवनशैली में आ रहा सकारात्मक बदलाव; तनाव से मुक्ति

– एकाग्रता और लक्ष्य प्राप्ति के लिए सिखाए जा रहे राजयोग और सकारात्मक चिंतन के सूत्र

बीके पुष्पेंद्र, आबू रोड, राजस्थान। विद्यार्थियों की सोच बदले तो उनका जीवन बदल सकता है और युवाओं की सकारात्मक सोच ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बन सकती है। इसी विचार को साकार करने के लिए ब्रह्माकुमारीज के शिक्षा प्रभाग ने राजयोग थॉट लैब की अनूठी पहल की है। इस अभिनव प्रयोग के माध्यम से अब तक 30 हजार से अधिक विद्यार्थी और शिक्षक लाभान्वित हो चुके हैं। इन लैब में विद्यार्थियों को नकारात्मक विचारों को सकारात्मक चिंतन में बदलने, तनाव से मुक्त रहने, मन की एकाग्रता बढ़ाने और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने की विधियां सिखाई जा रही हैं।

राजयोग थॉट लैब की शुरुआत वर्ष 2016 में जयपुर स्थित जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी से हुई। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से स्थापित इस लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से विचारों की शक्ति का व्यावहारिक अनुभव कराना है। इसकी उपयोगिता और सफलता को देखते हुए 20 अप्रैल 2018 को गुरुग्राम की नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी में भी थॉट लैब स्थापित की गई। इसके बाद 10 मई 2022 को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कुरुक्षेत्र में भी इसकी शुरुआत हुई। इन तीनों संस्थानों में अब तक 30 हजार से अधिक विद्यार्थी और शिक्षक इस पहल से जुड़कर लाभ प्राप्त कर चुके हैं।

35 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने किया अवलोकन

जयपुर की जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में स्थापित राजयोग थॉट लैब विशेष पहचान बना चुकी है। अब तक 35 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इसका अवलोकन कर चुके हैं। यहां वर्षभर ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनके माध्यम से 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों को विचारों की शक्ति, सकारात्मक चिंतन और राजयोग ध्यान का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

इस पहल का विस्तार करते हुए नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम में विद्यार्थियों के विचारों, आदतों और व्यवहार को समझने के लिए विशेष प्रयोग किए गए। काउंसलिंग, मोटिवेशन और मेडिटेशन के माध्यम से उन्हें नकारात्मक सोच से बाहर निकलकर सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। यहां सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ 150 से अधिक फैकल्टी सदस्य भी लाभान्वित हुए हैं। विद्यार्थियों की सोच, व्यवहार और आदतों में आए सकारात्मक बदलाव को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस पहल की सराहना की है।

देश के अन्य विश्वविद्यालयों तक विस्तार की तैयारी

राजयोग थॉट लैब की उपयोगिता को देखते हुए देश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी इसे स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, जालंधर में थॉट लैब का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा, महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में इसे शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अन्य विश्वविद्यालयों में भी इस पहल का विस्तार करने की योजना है। इस पहल से जुड़े विद्यार्थियों ने बेहतर एकाग्रता, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति स्पष्टता का अनुभव किया है। कई विद्यार्थियों ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और साक्षात्कार में सफलता के लिए भी इसे उपयोगी बताया है।

क्या है राजयोग थॉट लैब?

राजयोग थॉट लैब विद्यार्थियों के विचारों की गुणवत्ता को समझने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने वाली विशेष प्रयोगशाला है। यहां मोटिवेशन, काउंसलिंग और राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से विचारों की शक्ति का महत्व समझाया जाता है। विद्यार्थियों को बताया जाता है कि विचारों का प्रभाव हमारी अनुभूति, दृष्टिकोण, व्यवहार और कर्मों पर पड़ता है। जैसे विचार होते हैं, वैसी ही भावनाएं और वैसा ही व्यवहार विकसित होने लगता है। इस प्रक्रिया को समझकर विद्यार्थी अपने विचारों के प्रति जागरूक बनते हैं और स्वयं को सकारात्मक दिशा देने का अभ्यास करते हैं। उन्हें तनाव, चिंता, निराशा, हीन भावना और नकारात्मकता से बाहर निकलकर खुशी, शांति, आत्मविश्वास और उत्साह के साथ जीवन जीने के सूत्र दिए जाते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी की प्रगति का रिकॉर्ड भी रखा जाता है, जिससे उसके विचारों और व्यवहार में हो रहे बदलाव को समझने में मदद मिलती है।

युवाओं की छिपी प्रतिभा को निखारने का लक्ष्य

थॉट लैब का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को तनावमुक्त करना नहीं, बल्कि उनकी आंतरिक क्षमताओं को पहचानकर उन्हें श्रेष्ठ व्यक्तित्व के रूप में विकसित करना है। युवाओं में सकारात्मक विचार शक्ति, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और लक्ष्य के प्रति समर्पण बढ़ाकर उन्हें राष्ट्र निर्माण और समाज निर्माण के लिए तैयार करना इसका प्रमुख लक्ष्य है। विद्यार्थियों को यह भी समझाया जाता है कि वे अपने भाग्य के निर्माता स्वयं हैं। उनके विचार ही उनकी अनुभूतियों, दृष्टिकोण और कर्मों की दिशा तय करते हैं। इसलिए श्रेष्ठ जीवन के लिए श्रेष्ठ विचारों का निर्माण आवश्यक है।

विशिष्ट हस्तियों ने भी की सराहना…. राजयोग थॉट लैब की पहल को देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने सराहा है।

  • पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. एएस किरण कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन के एक अत्यंत आवश्यक पहलू से परिचित कराने का यह नया और उपयोगी विचार है। उन्होंने इस प्रयास की सफलता की कामना की।
  • पूर्व एआईसीटीई अध्यक्ष डॉ. अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिदिन इस प्रयोगशाला में कुछ समय बिताना चाहिए। इससे उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
  • प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता बीके शिवानी दीदी ने कहा कि स्पिरिचुअल रिसर्च सेल के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाकर उनके अच्छे भाग्य की नींव रखी जा रही है। इससे न केवल उनका, बल्कि उनके परिवार का जीवन भी संवरता है। राजयोग थॉट लैब का यह प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में एक नई सोच प्रस्तुत कर रहा है, जहां विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक सफलता ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक व्यक्तित्व और श्रेष्ठ जीवन जीने की कला भी सिखाई जा रही है।

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